संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र की एक
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर इस साल 5.3 प्रतिशत रहने की
उम्मीद है जो कि अनुमानित गति से धीमी है। हालांकि रिपोर्ट में बताय गया
है कि देश आर्थिक नरमी के सबसे बुरे दौर से उबर गया है।
संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक स्थिति एवं संभावना, 2014
(डब्ल्यूईएसपी) रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश में मामूली सुधार और
जबरदस्त निर्यात से देश की जीडीपी में धीरे धीरे तेजी लाने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2013 में और घट गई
जिसकी मुख्य वजह घरेलू उपभोग में गिरावट एवं सुस्त निवेश है। कैलेंडर वर्ष
2013 में भारत की वृद्धि दर घटकर 4.8 प्रतिशत पर आ गई जो 2012 में 5.1
प्रतिशत थी। भारत का सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया का 70 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार ‘भारत की नरमी का दौर खत्म हो गया लगता है पर हालात
में सुधार की प्रक्रिया उम्मीद से धीमी रह सकती है। 2014 में आर्थिक
गतिविधियों का विस्तार 5.3 प्रतिशत और 2014 में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान
है।’ संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि बाहर के देशों में स्थितियां चुनौतीपूर्ण
बनी हुई हैं क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी मात्रा में पूंजी बाहर
जा रही है जिसकी वजह से रुपए की विनिमय दर में तेज गिरावट देखने को मिल रही
है। रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छे मानसून, निवेश में सुधार और वैश्विक
स्थितियों में सुधार के चलते निर्यात क्षेत्र की मजबूत वृद्धि से जीडीपी
वृद्धि दर में धीरे धीरे तेजी आने की संभावना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की
वृद्धि दर 2014 में 3 प्रतिशत रहने और 2015 में इसके 3.3 प्रतिशत पर
पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वर्ष 2013 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि 2.1
प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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