भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही के दौरान हल्की रिकवरी देखी गई है और शायद इसी से उत्साहित होकर तमाम विश्लेषकों से लेकर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम तक फिर से देश की अर्थव्यवस्था में जल्द ही तेज ग्रोथ होने की बात कहने लगे हैं। लेकिन, अर्थव्यवस्था के मूलभूत आंकड़े इस आशावादी रुख के समर्थन में नहीं दिखते। पेश है देश के मौजूदा आर्थिक हालात और भविष्य में इसकी संभावनाओं को तलाश करती बिजनेस भास्कर के अरविंद कुमार की विशेष कवरेज :
एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ चुकी देश की आर्थिक ग्रोथ में हाल में हल्की रिकवरी देखी गई है। इस रिकवरी से उत्साहित वित्त मंत्री पी. चिदंबरम साल 2016 में फिर से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आठ फीसदी की ग्रोथ तक पहुंचने की उम्मीद जताने लगे हैं।
लेकिन, मौजूदा घरेलू व अंतरराष्ट्रीय हालातों के मद्देनजर इसे केवल बयानबाजी ही कहा जा सकता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था मजबूत फंडामेंटल्स पर चलती है, आशावादी रवैये पर नहीं। वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान भारत के जीडीपी में महज पांच फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई थी, जो कि इसका एक दशक का सबसे निचला स्तर था। इससे पहले वित्त वर्ष 2002-03 में जीडीपी ग्रोथ दर चार फीसदी पर रही थी।
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