सख्ती - धोखाधड़ी करने पर 6 वर्ष की कैद व एक लाख का जुर्माना
फंसा धन
गोल्डन फॉरेस्ट में 12 वर्ष से फंसा है सैकड़ों निवेशकों का 1400 करोड़ रुपये
चिट फंड कंपनियों पर शिकंजे के लिए पंजाब-हरियाणा ने सख्त कानून किये लागू
एनबीएफसी को अपने बारे में प्राधिकृत अधिकारियों को जानकारी भी देनी होगी
पंजाब व हरियाणा में 288 एनबीएफसी कार्यरत
पश्चिम बंगाल में शारदा इनवेस्टमेंट कंपनी की धोखाधड़ी के मामले से सबक लेते हुए पंजाब व हरियाणा ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाली चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए अपने कानून में किये संशोधन पारित कर दिये हैं।
नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की सलाह पर वहीं हरियाणा ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में जमाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा (वित्तीय प्रतिष्ठान), बिल 2013 को स्वीकृति दी है।
वहीं पंजाब ने भी प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपोजिटर्स बिल 2012 लागू कर दिया है। 12 साल पहले यहां के निवेशक गोल्डन फॉरेस्ट चिट फंड कंपनी की धोखाधड़ी के शिकार हुए थे। हजारों निवेशकों का गोल्डन फॉरेस्ट में तकरीबन 1400 करोड़ रुपया पिछले 12 वर्ष से अटका है।
पंजाब व हरियाणा में आरबीआई से पंजीकृत 288 एनबीएफसी कार्यरत हैं। पंजाब ने एनबीएफसी के निवेशकों के हित में प्रावधान किया है कि निवेशकों को उनकी जमा राशि न लौटाने पर या किसी तरह की अन्य धोखाधड़ी करने पर 6 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। ऐसे मामले में एनबीएफसी के प्रबंधकों व मालिकों की प्रॉपर्टी भी कुर्क की जा सकती है।
इस बिल में यह प्रावधान भी किया गया है कि राज्य में संचालित तमाम एनबीएफसी को अपने बारे में प्राधिकृत अधिकारियों को जानकारी भी देनी होगी। जानकारी न देने वाली डिफाल्टर कंपनियों के प्रमोटर्स को 3 महीने की कैद व एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान बिल में किया गया है। एनबीएफसी के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें भी गठित की जाएंगी।
पंजाब में तकरीबन 200 एनबीएफसी कार्यरत हैं जिनमें से 80 एनबीएफसी निवेशकों से डिपॉजिट लेती हैं। इधर हरियाणा में 88 एनबीएफसी पंजीकृत है।
बिल से यह सुनिश्चित होगा कि एनबीएफसी सुदृढ़ तर्ज पर कार्य करे। एनबीएफसी द्वारा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की जाएगी तथा उन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियम लागू होंगे। राज्य सरकार के पास इन कम्पनियों को गिरफ्तार करने की शक्तियां होंगी और इनकी सम् पत्तियां जब्त की जाएंगी।
जनता के साथ धोखाधड़ी करते है तो जमाकर्ताओं को कम्पनी बोर्ड कानून के तहत वसूली का अधिकार होगा। कंपनी के प्रोमोटर,भागीदार, निदेशक, प्रबंधक या अन्य व्यक्ति या कर्मचारी जो ऐसे प्रतिष्ठिानों के कारोबार संचालन या प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है को दो लाख रुपये के साथ सात साल तक की सजा हो सकती है और संस्थानों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
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