Saturday, September 21, 2013

टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस डील पर भड़की एयर एशिया, कहा अंधेरे में रखा गया हमें

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टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस डील पर भड़की एयर एशिया, कहा अंधेरे में रखा गया हमें
देश के प्रमुख उद्योग समूह टाटा संस की हिस्सेदारी वाली कंपनी एयर एशिया इंडिया ने टाटा संस के सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर नयी विमानन कंपनी टाटा एसआईए एयरलाइंस लिमिटेड बनाने के फैसले पर कड़ा एतराज जताया है।
 
एयर एशिया इंडिया में टाटा संस की 30 प्रतिशत और टेलेस्ट्राट्रेडप्लेस के अरुण भाटिया की 21 फीसदी हिस्सेदारी है। भाटिया ने टाटा संस के सिंगापुर एयरलाइंस के साथ हाथ मिलाने को कारोबारी नैतिक मानदंडों के खिलाफ बताते हुए कहा कि है इस मामले में उन्हें अंधेरे में रखा गया है और उनसे किसी तरह का मशविरा नहीं किया गया।
 
भाटिया ने कहा है कि वह इस मामले को एयर एशिया इंडिया की 28 सितंबर को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में उठाएंगे। टाटा संस ने सिंगापुर एयरलाइंस के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने की घोषणा 19 सितंबर को की थी।
 
इस उपक्रम में टाटा संस की 51 फीसदी, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। दोनों कंपनियों ने इसके लिये 10 करोड डॉलर का शुरुआती निवेश करने की घोषणा की है।

Wednesday, September 18, 2013

इन्फोसिस ने बाजार में उतारा फिनाकल का नया संस्करण

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इन्फोसिस ने बाजार में उतारा फिनाकल का नया संस्करण
नई पेशकश
बैंकिंग सेक्टर के सामने आ रही आईटी इन्फ्रा की चुनौतियों का जवाब देने की तैयारी
फिनाकल 11ई से वैश्विक स्तर पर बैंकिंग कंपनियों को नया सॉल्यूशन देने का दावा

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा निर्यातक कंपनी इन्फोसिस ने बुधवार को अपने बैंकिंग सॉल्यूशन फिनाकल का नया संस्करण लांच किया। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी दखल बढ़ाने के उद्देश्य से यह संस्करण लांच किया है।
इन्फोसिस के वरिष्ठ वाइस प्रेसीडेंट और फिनाकल के ग्लोबल हेड एम. हरगोपाल ने कहा,'फिनाकल 11ई के साथ हमने हर आकार के बैंकों को रिस्क को कम करते हुए फेज्ड मैनर में अपने कामकाज को आधुनिक करने का माध्यम प्रदान करने की कोशिश की है।
यह बैंकों की क्षमता और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर करेगा। यह हर चैनल में प्रभावी होगा।' उन्होंने कहा कि आज की तारीख में 81 देशों के 168 बैंकों में फिनाकल की सेवा ली जा रही है।
और इसी के साथ बैंकिंग से जुड़ी कुल आबादी का 14 फीसदी फिनाकल की सेवा को अनुभव ले रहा है। जून तिमाही के दौरान इन्फोसिस के 11,267 करोड़ रुपये के कारोबार में बैंकिंग सेवा कारोबार की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही थी।
हरगोपाल ने कहा,'नई पेशकश  है। यह वैश्विक स्तर पर बैंकिंग की परिस्थिति के हिसाब से मजबूती से कार्य करने में सक्षम है।
नया सॉल्यूशन वैश्विक स्तर पर, खासकर अमेरिका और यूरोप के विकसित बाजारों में फिनाकल के विकास का प्रमुख आधार बनेगा।' घरेलू बाजार में 50 फीसदी से अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक तथा आठ विदेशी बैंक फिनाकल की सेवा ले रहे हैं। फिनाकल के जरिए बैंकिंग से जुड़ी देश की 40 फीसदी आबादी को सेवा प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा,'वृहद अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता, नियामकीय खलबली और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के कारण बैंकिंग के तरीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है। हालांकि यह बड़े बदलाव बैंकों के बहुत मुश्किल भरे और खर्चीले भी साबित होते हैं। फिनाकल 11ई बैंकों को इस आधुनिकीकरण में सहायता प्रदान करेगा।
' उन्होंने कहा कि शोधों से यह पता चलता है कि अकेले बैंकिंग तकनीक की दुरुहता को कम करके लाभ में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है। आईटी की दुरुहता और कुशलता की कमी बैंकों के आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की सबसे बड़ी बाधा हैं। नया संस्करण इसी चुनौती का जवाब है।

Tuesday, September 17, 2013

आम आदमी से जुड़ी खबर: 1 महीने तक सस्ता नहीं होगा प्याज, सोने पर सरकार की टेढ़ी नजर

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आम आदमी से जुड़ी खबर: 1 महीने तक सस्ता नहीं होगा प्याज, सोने पर सरकार की टेढ़ी नजर
एक तरफ जहां प्याज की कीमतें आम आदमी के आंसू निकालने में लगी हैं वहीं, सरकार और आरबीआई सोने की बिक्री पर शिकंजा लगाकर लोगों की मुश्किलें बढ़ाने में लगी है। 
 
मंगलवार को दिल्ली में प्याज 80 रुपए प्रति किलो के स्तर को भी पार कर गया जबकि पिछले साल की शुरुआत में प्याज 20 रुपए किलो में मिल जाता था। सोने की बात करें तो, सरकार द्वारा गोल्ड ज्वैलरी पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया। इसका मकसद सोने के प्रति आम आदमी के बढ़ते लगाव को खत्म करना है। 
 
प्याज और सोने से जुड़ी इन दो खबरों की जुगलबंदी से आम आदमी की जेब कटनी तय मानी जा रही है। इतना ही नहीं, आने वाले दिनों में जहां प्याज की कीमतें 100 रुपए किलो तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है वहीं, सोने पर पाबंदी भी बढ़ेगी। इन सबका सीधा असर आप पर पड़ने वाला है।

Monday, September 16, 2013

पैसा न लौटाने पर कंपनी की सम्पत्तियां होंगी जब्त

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पैसा न लौटाने पर कंपनी की सम्पत्तियां होंगी जब्त
सख्ती - धोखाधड़ी करने पर 6 वर्ष की कैद व एक लाख का जुर्माना

फंसा धन
गोल्डन फॉरेस्ट में 12 वर्ष से फंसा है सैकड़ों निवेशकों का 1400 करोड़ रुपये
चिट फंड कंपनियों पर शिकंजे के लिए पंजाब-हरियाणा ने सख्त कानून किये लागू
एनबीएफसी को अपने बारे में प्राधिकृत अधिकारियों को जानकारी भी देनी होगी

पंजाब व हरियाणा में 288 एनबीएफसी कार्यरत

पश्चिम बंगाल में शारदा इनवेस्टमेंट कंपनी की धोखाधड़ी के मामले से सबक लेते हुए पंजाब व हरियाणा ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाली चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए अपने कानून में किये संशोधन पारित कर दिये हैं।
नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की सलाह पर वहीं हरियाणा ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में  जमाकर्ताओं के अधिकारों  की रक्षा (वित्तीय प्रतिष्ठान), बिल 2013 को स्वीकृति दी है।
वहीं पंजाब ने भी प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपोजिटर्स बिल 2012 लागू कर दिया है। 12 साल पहले यहां के निवेशक गोल्डन फॉरेस्ट चिट फंड कंपनी की धोखाधड़ी के शिकार हुए थे। हजारों निवेशकों का गोल्डन फॉरेस्ट में तकरीबन 1400 करोड़ रुपया पिछले 12 वर्ष से अटका है।
पंजाब व हरियाणा में आरबीआई से पंजीकृत 288 एनबीएफसी कार्यरत हैं। पंजाब ने एनबीएफसी के निवेशकों के हित में प्रावधान किया है कि निवेशकों को उनकी जमा राशि न लौटाने पर या किसी तरह की अन्य धोखाधड़ी करने पर 6 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। ऐसे मामले में एनबीएफसी के प्रबंधकों व मालिकों की प्रॉपर्टी भी कुर्क की जा सकती है।
इस बिल में यह प्रावधान भी किया गया है कि राज्य में संचालित तमाम एनबीएफसी को अपने बारे में प्राधिकृत अधिकारियों को जानकारी भी देनी होगी। जानकारी न देने वाली डिफाल्टर कंपनियों के प्रमोटर्स को 3 महीने की कैद व एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान बिल में किया गया है। एनबीएफसी के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें भी गठित की जाएंगी।
पंजाब में तकरीबन 200 एनबीएफसी कार्यरत हैं जिनमें से 80 एनबीएफसी निवेशकों से डिपॉजिट लेती हैं। इधर हरियाणा में 88 एनबीएफसी  पंजीकृत है।
बिल से यह सुनिश्चित होगा कि एनबीएफसी सुदृढ़ तर्ज पर कार्य करे। एनबीएफसी द्वारा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की जाएगी तथा उन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियम लागू होंगे। राज्य सरकार के पास इन कम्पनियों को गिरफ्तार करने की शक्तियां होंगी और इनकी सम् पत्तियां जब्त की जाएंगी।
जनता के साथ धोखाधड़ी करते है तो जमाकर्ताओं को कम्पनी बोर्ड कानून के तहत वसूली का अधिकार होगा। कंपनी के प्रोमोटर,भागीदार, निदेशक, प्रबंधक या अन्य व्यक्ति या कर्मचारी जो ऐसे प्रतिष्ठिानों के कारोबार संचालन या प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है को दो लाख रुपये के साथ सात साल तक की सजा हो सकती है और संस्थानों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

Friday, September 13, 2013

सख्ती बरकरार रही तो लाखों यूरोपियन हो जाएंगे गरीब

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सख्ती बरकरार रही तो लाखों यूरोपियन हो जाएंगे गरीब
आर्थिक संकट से पार पाने के लिए कई तरह के सामाजिक खर्चों में कटौती की तैयारी कर रही हैं यूरोपीय सरकारें

तीखी आलोचना - सामाजिक, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मदों में कटौती के सरकारी प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ऑक्सफेम ने तीखी आलोचना करते हुए ऐसी नीतियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहूदा करार दिया है। एजेंसी का कहना है कि ऐसी नीतियों से 2025 तक 2.5 करोड़ और यूरोपियन गरीबी का शिकार हो सकते हैं।

जहां एक ओर यूरोपीय देशों की सरकारें मौद्रिक सख्ती की नीतियां अपनाने पर जोर दे रही हैं वहीं दूसरी ओर वैश्विक एजेंसी ऑक्सफेम ने कहा है कि अगर सरकारें इन जटिल नीतियों को आगे जारी रखेंगी तो 2025 तक 2.5 करोड़ यूरोपीय लोग गरीबी के चंगुल में फंस सकते हैं। एजेंसी ने ऐसी नीतियों को नैतिक और आर्थिक लिहाज से बेहूदा करार दिया है।
ऑक्सफेम ईयू की प्रमुख नतालिया अलोंसो ने कहा,'आर्थिक संकट से जूझ रहे यूरोप में दशकों के सामाजिक अधिकार छिनने का भय छाया है। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मदों में खर्च में अत्यधिक कटौती तथा कर्मचारियों के कम अधिकार और अप्रासंगिक कर लाखों यूरोपियन को गरीबी के ऐसे कुचक्र में धकेल रहा है
जिससे बाहर आने में पीढिय़ां गुजर जाएंगी। यह नैतिक और आर्थिक रूप से बेहूदा कदम है।' उन्होंने कहा,'इन सख्त नीतियों से सिर्फ 10 फीसदी बेहद अमीर यूरोपियन को लाभ हो रहा है जिनकी संपत्ति बढ़ रही है।
ग्रीस, आयरलैंड, इटली, पुर्तगाल, स्पेन और यूके जैसे देश जो कि बेहद तेजी से इन कठोर कदमों को उठा रहे हैं वे जल्द ही दुनिया में सामाजिक तौर पर सबसे असंतुलित देशों में शुमार हो जाएंगे। इनके नेताओं को इस पहलू पर भी समय रहते विचार करना चाहिए। उदाहरणस्वरूप यूके और स्पेन में अमीर और गरीब का अंतर उतना ही हो जाएगा जितना कि दक्षिण सूडान या पराग्वे में है।'
एजेंसी का कहना है कि अगर इन कठोर नीतियों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो 2025 तक 1.5 से 2.5 करोड़ यूरोपियन गरीबी के गर्त में चले जाएंगे।
ऑक्सफेम ने चेतावनी देते हुए कहा है कि गरीबी के गर्त में समाये यूरोपियनों का आंकड़ा 14.6 करोड़ तक पहुंच जाएगा, जो कि कुल आबादी का चौथाई है। ऑक्सफेम ने कहा कि सामाजिक खर्च में कटौती के मामले में 1980 और 90 के दशक में लैटिन अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में की गई इस प्रकार की कटौती से सीख लेनी चाहिए।
इन क्षेत्रों के कुछ देशों को रास्ते पर लौटने में दो दशक का वक्त लग गया।
एजेंसी का कहना है कि कठोरता के कदमों के और भी कई विकल्प हैं। यूरोपीय सरकारों को एक नए आर्थिक और सामाजिक मॉडल लाने का प्रयास करना चाहिए जिसमें कि जनता में निवेश हो, लोकतंत्र मजबूत हो और कर का प्रासंगिक ढांचा बने।

Thursday, September 12, 2013

पेट्रोल की कीमत 1.50 रुपए तक हो सकती है कम

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पेट्रोल की कीमत 1.50  रुपए तक हो सकती है कम
नई दिल्ली। बढ़ती पेट्रोल की कीमतों से जल्द आपको थोड़ी राहत मिल सकती है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के चलते अगले सप्ताह तक पेट्रोल की कीमत को 1.50  रुपए तक कम किया जा सकता है। हालांकि एलपीजी की कीमतों में बढ़ोती की जा सकती है। 

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